NIYAL Tablet review मासिक धर्म के समय दर्द की मशहूर टैबलेट

Author channel Medicine Reviews   9 мес. назад
1,560 views

15 Like   1 Dislike

Stomach Worms Natural Treatment //पेट के कीड़े पूरी जानकारी, दवा, इलाज़ //Pet Ke Kido Ka Ilaj

Stomach Worms Natural Treatment पेट के कीड़े पूरी जानकारी, दवा, इलाज़ Pet Ke Kido Ka Ilaj पेट के कीड़े- पूरी जानकारी, दवा, इलाज़ इस लेख में हम पेट के कीड़े होने का कारण/ लक्षण, पेट के कीड़े मारने की दवा (रोकने या छुटकारा पाने का समाधान/ उपचार), घरेलु उपाय, दवा तथा घरेलू नुस्खे बताएंगे। पेट के कीड़े: कीड़े शरीर में छिपा हुआ ऐसा रोग है जो कि ऊतकों में, अंग में और खून में पैदा होसकता है। पहले आपको बतादेकिपेट में कीड़ा कैसे विकसितहोता है। परजीवी या कीड़े कीश्रेणी में गोल, फीता कृमि इत्यादि शामिल है।ये परजीवी किसी भी आकार का होसकता है और कई प्रकारकीसमस्या उत्पन्न कर सकते हैं। कुछ कीड़े लाल रक्त कोशिकाओं कोअपना आहार बनाकर एनीमिया का शिकार बना देता है। शेष कीड़े आपके भोजन का उपभोग करते है। ये आपको भूखा रखते हुए, वजन बढ़ने से रोकता है। पेट के कीड़े से खुजली, चिड़चिड़ापन, और यहां तक कि अनिद्रा की समस्या का भी सामना करना पड़ता है। पेट में कीड़े होने के लक्षण: - कब्ज़ की शिकायत - खाने का न पच पाना - दस्त का होना - खाना खाने के तुरन्त बाद मल का आ जाना - मल में बलगम तथा खून आना - पेट में दर्द तथा जलन - गैस और सूजन का अनुभव - बवासीर का हो जाना - थकान होना - अत्यधिक कमजोरी - त्वचा रोग और एलर्जी कीड़े जो कि त्वचा में प्रवेश करते है, खुजली को जन्म देता है। जब ऊतकों को इन परजीवियों से सूजन होता है, तब श्वेत रक्तकोशिका शरीर कीसुरक्षा करना प्रारंभ करती है। यह प्रतिक्रिया त्वचा परचकत्ते का कारण बनती है। - भंगुर बाल तथा शुष्क त्वचा - त्वचा के नीचे सनसनी रेंगना - दानेदार घाव - धीरे सजगता - निद्रा संबंधी परेशानियां - नींद के दौरान दांत पीसना - वजन और भूख समस्या - मांसपेशियों और जोड़ों की शिकायत - रक्त विकार - यौन और प्रजनन समस्या - सांस लेते समय मुसीबत इन कीड़ों से बचने के लिए कुछ मेडिकल परीक्षण तथा इलाज आवश्यक है। इन परीक्षणों के बीच परम्परागत अंडाणु और परजीवी स्टूल टेस्टबहुत महत्वपूर्ण है। अंडाणु और परजीवी स्टूल टेस्ट: परम्परागत मल परीक्षण आपके मल में परजीवी या परजीवी अंडे पहचान सकता है। इस परीक्षण की अभी भी कुछ सीमाएं है। इस परीक्षण में तीन अलग-अलग मल के नमूने की जाँच अति आवश्यक है। सभी नमूनों को सूक्ष्मदर्शी से जाँच के लिए चिकित्सक के पास भेजा जाना चाहिए। परजीवियों का एक बहुत ही अनोखा जीवन चक्र होता है जो उन्हें निष्क्रिय चीजों में भी जिंदारखता है। इस पारंपरिक परीक्षण में उन्हें पहचानने के लिए, परजीवीजीवित होना चाहिए। ताकि चिकित्सक कीड़े से बचने के लिए उचित दवा दे सके। रोकथाम व घरेलू उपचार: - कद्दू के बीज, अंजीर और तिल के बीज का दैनिक तीन बार खाली पेट उपभोग करें। - केवल बोतल बंद मिनरल पानी पिएं। - चीनी, वसा, मांस, चिकन, भेड़ और सुअर का मांस उत्पादों उपयोग न करना। - परजीवी विनाशकारी शक्तियों के लिए अनानास खाएं। - भोजन के 30 मिनट पहले याबाद कुछ मात्रा में पपीता खाएं। - इस समय अंतरंग संबंध बनाने से बचें। - अंडरवियर, बिस्तर और तौलिये को प्रत्येक उपयोग के बादगर्म पानी में धो लें। - बार बार हाथ धोएं। - इस समस्या के दौरान कॉफी, शराब से बचें। - परजीवी विरोधी खाद्य पदार्थ जैसे कि सरसों के बीज खाएं। - सुबह खाली पेट छाछ लें। - दही के साथ पुराने नारियल लें। नारियल का पाउडर बनाने के बाद उसे एक डिब्बे में रख दें। प्रत्येक दिन एक चम्मच नारियल पाउडर को एक कप दही में मिलाएं और दिन में तीन चार बार खाना खाने से पहले ले। यह तीन से चार दिन में हर प्रकार के कीड़े को निकाल देता है। खाली पेट खजूर खाना पेट के कीड़ों से बचने का सबसे बेहतरीन उपाय है। - अदरक पेट के कीड़े को मारने का प्राकृतिक स्त्रोत है।अदरक की चार-पांच पोथी छील लें। उन्हें छोटे टुकड़ों में काट कर शहद केसाथ मिला ले तथा कुछ मात्रा में काला नमक डालें। इससे बने घोल को दिन में कम से कम तीन बार मरीज को दे। - गाजर का जूस पिए। - ताजा आडू के टुकड़ों को नमक के साथ खाएं। ऊपर दी गई हुई सभी प्रक्रियाओं का सावधानियां से प्रयोग कर आप पेट के कीड़ों से बहुत जल्द मुक्ति पा सकते हैं। सलाह व परहेज: - सब्जियों में चुकंदर, लहसुन, भिंडी, मटर, मूली, मीठे आलू, टमाटर, शलजम इत्यादि का प्रयोग करें। - फलों में केले, जामुन, चेरी, अंगूर, कीवी फल, नींबू, तरबूज, संतरा, पपीता, अनानास, आलू बुखारा, अनार की छाल और पत्तियों कासेवन करें। - औषधीय जड़ी बूटी में एंजेलिका, राख लौकी बीज, सुपारी, काले अखरोट हल्स, झूठी गेंडा, गोल्डन सील जड़ तथा अजवाइन का उपयोग करें। आप इन प्रक्रियाओं को अपना कर पेट के कीड़ों से छुटकारा पा सकते हैं तथा स्वस्थ जीवन व्यतीत कर सकते हैं। Produced by Ayurveda India Video URLhttps://youtu.be/HeEjJzlwong

आदमी के पास औरत खुद आती है उसके बाद होता है कुछ ऐसा

knee osteoarthritis(घुटने के आर्थ्राइटिस) explained in Hindi by Dr. Pankaj Walecha.

Osteoarthritis, commonly known as wear-and-tear arthritis, is a condition in which the natural cushioning between joints -- cartilage -- wears away. When this happens, the bones of the joints rub more closely against one another with less of the shock-absorbing benefits of cartilage. The rubbing results in pain, swelling, stiffness, decreased ability to move and, sometimes, the formation of bone spurs. What Causes Knee Osteoarthritis? The most common cause of osteoarthritis of the knee is age. Almost everyone will eventually develop some degree of osteoarthritis. However, several factors increase the risk of developing significant arthritis at an earlier age. Age. The ability of cartilage to heal decreases as a person gets older. Weight. Weight increases pressure on all the joints, especially the knees. Every pound of weight you gain adds 3 to 4 pounds of extra weight on your knees. Heredity. This includes genetic mutations that might make a person more likely to develop osteoarthritis of the knee. It may also be due to inherited abnormalities in the shape of the bones that surround the knee joint. Gender. Women ages 55 and older are more likely than men to develop osteoarthritis of the knee. Repetitive stress injuries. These are usually a result of the type of job a person has. People with certain occupations that include a lot of activity that can stress the joint, such as kneeling, squatting, or lifting heavy weights (55 pounds or more), are more likely to develop osteoarthritis of the knee because of the constant pressure on the joint. Athletics. Athletes involved in soccer, tennis, or long-distance running may be at higher risk for developing osteoarthritis of the knee. That means athletes should take precautions to avoid injury. However, it's important to note that regular moderate exercise strengthens joints and can decrease the risk of osteoarthritis. In fact, weak muscles around the knee can lead to osteoarthritis. Other illnesses. People with rheumatoid arthritis, the second most common type of arthritis, are also more likely to develop osteoarthritis. People with certain metabolic disorders, such as iron overload or excess growth hormone, also run a higher risk of osteoarthritis.

एड़ियों तलवे का दर्द भूल जायेगे रातो रात करे यह आसान घरेलु...

एड़ियों तलवे का दर्द भूल जायेगे रातो रात करे यह आसान घरेलु तकनीक का उपयोग heel pain cure Is video main dekhe kaise bahut hi asane se aap aapne edi ke dard ko kam kar sakte hain. इस वीडियो मैं देखे कैसे बहुत ही उसने से आपने यदि के दर्द को काम कर सकते हैं youtube channel - http://www.youtube.com/c/VikrantSawan... facebook page - www.facebook.com/vikrantsawantyoga https://plus.google.com/u/0/+VikrantS... Titles एड़ी के दर्द का घरेलू उपचार,एड़ी के दर्द,घरेलू उपचार, Home Remedies For Heel Pain, एड़ी दर्द, kaise kare edi dard kam, gharelu upchaar talvo ke dard ke liye, talvo ka dard, edi dard kaise kare kam, kam kare talvo ka dard, kam kare edi dard, heel ka dard kaise kare kam, kaise kam kare heel pain, heel pain ka gharelu nuskha, gharelu upchaar edi dard ka, edi dard ka gharelu upchaar, edi dard ka ilaj, talvo ke dard ka ilaj, eelaaj edi dard ka, kaise kare kam edi dard yog se, Pairon Ka Dard,Pairon Heel Pain,Home Remedies,Heel,Pain,एड़ी,दर्द,Pairon Ka Dard,Pairon,Dard,Health Tips In Hindi,Health Tips,TiIn Hindi,#aedi ka dard,#aedi,#heel,#pain,#heel pain,#remedies for heel pain,#home remedies for heel pain,#natural remedies to heel pain,Foot Pain,Pairon mei dard ke upay,#gharelu upchar,#gharelu upchar for heel pain,#upchar,Aedi Ke dard Ke Gharelu

मासिक धर्म ज्यादा दिन तक होने पर क्या करें

मासिक धर्म बहुत ज्यादा खून आना

NIYAL Tablet review मासिक धर्म के समय दर्द की मशहूर टैबलेट
Nimesulide is a nonsteroidal anti-inflammatory drug (NSAID) with pain medication and fever reducing properties. Its approved indications are the treatment of acute pain, the symptomatic treatment of osteoarthritis, and primary dysmenorrhoea in adolescents and adults above 12 years old.
Diclofenac is a nonsteroidal anti-inflammatory drug (NSAID) taken or applied to reduce inflammation and as an analgesic reducing pain in certain conditions #onlinemedicine,#medicine,#ayurveda,#ayurved ,#Ayurvedic

Comments for video:

Similar video